Thursday, March 6, 2008

मैंने गाँधी को नहीं मारा था

लहरों से दर्र कर नौका पार नहीं होतिहिम्मत कर ने वालों की हार नहीं होती
नन्हीं चितीं जब दाना लेकर चलती हैचाध्ती दीवारों पर सौ बार फिसलती हैमन्न

का विश्वास रगों में साहस भरता हैचाध कर गिरना, गिरकर चढ़ना ना आकर्ता हैआखिर उसकी म्हणत बेकार नहीं होतिकोशिश करने वालों की हार नहीं होती
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता हैजा जा कर खाली हाथ लौट आता हैमिलते न शहज मोटी पानी मेंबेहता दूना उत्साह इसी हैरानी मेंमुथी उसकी खाली हर बार नहीं होतिहिम्मत करने वालों की हार नहीं होती
असफलता एक चुनौती है स्वीकार करोक्य कमी रह गई देखो और सुधार करोजब तक न सफल हो नींद चैन को त्यागो तुम्संघर्शों का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुच्छ किए बिना ही जय जय कर नहीं होतिहिम्मत करने वालों की हार नहीं होती

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